शनिवार, जुलाई 31, 2010

तुम्हारे जन्मदिन पर ...

कभी मुस्कराना ,कभी गुनगुनाना यूँ ही बेवजह नाच पड़ना...
क्योँ तेरी कुछ चीजें मुझे अच्छी नहीं लगती ।।

जैसा जहर में डूबा हुआ, निवाला निगल लिया हो...
क्योँ तेरी हर बात मुझे अच्छी नहीं लगती ।।

पन्नों में दबे फूल, मेरी किताब से गायब हैं...
क्योँ तेरी हर आदत मुझे अच्छी नहीं लगती ।।

दीवार पर लिख कर, मिटा देता हूँ तेरा नाम...
क्योँ तेरी हर तसवीर मुझे अच्छी नहीं लगती ।।

कहते हैं,लम्हों में कट जाता है सदियोँ का सफ़र...
क्योँ उस रात के बाद कोई सुबह अच्छी नही लगती।।