रविवार, मई 03, 2009

मैं ये नहीं था !



रोते हुए हाथों के समेटे कपडे लिए ,
जब मैं उतरा था,
स्टेशन की इस ओर ,
मैं ये नहीं था |

सूरज की पहली किरण से पहले ,
जब मैंने कदम रखा था
पहाडों की इस ओर,
मैं ये नहीं था |

खूबसूरत पलों को इंतज़ार था मेरा ,
जब मैं खोया था,
यादों की उस ओर ,
मैं ये नहीं था |

जब सपने सजाये थे मैंने,
कुछ कर दिखाने के ,
पलकों की उस ओर ,
मैं ये नहीं था |

किताबों में समेट रहा था ,
खुद को जब नये साथ मिले थे,
मेरी तन्हाई की इस ओर,
मैं ये नहीं था |

एक नया एहसास जनमा था,
जब मिली थी मुझसे कोई,
मेरी दुनिया की ओर ,
मैं ये नहीं था |

दो कदम ढंग से भी नहीं चले थे,
जब तुमने राह मोडी थी,
अपनी दुनिया की उस ओर ,
मैं ये नहीं था |

दोस्तों की महफिल में गम लिए,
जब लाल रंग उतारा था,
अपने खून की इस ओर,
में ये नहीं था |

दिल में टूटते शब्दों को,
जब पहली बार उतारा था,
पन्नो की इस ओर,
मैं ये नहीं था |

मैं कुछ तो छोड़ आया हूँ पीछे,
मैं कुछ तो बदल गया हूँ ,
मैं मैं था,जब
मैं ये नहीं था |